हर साल 1 से 7 सितंबर तक पूरे देश में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (National Nutrition Week) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत केंद्र सरकार ने 1982 में की थी ताकि लोगों को सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा सके।
आज के समय में कुपोषण एक बहुत बड़ी समस्या है। दुनिया भर में लगभग 200 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में कुपोषण का शिकार हैं। अगर सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। इसी वजह से आज देश में हजारों ऐसे युवाओं की जरूरत है जो हेल्थ, फूड साइंस और न्यूट्रिशन के क्षेत्र में काम करके समाज को स्वस्थ बना सकें।
क्या होता है कुपोषण और इसके मुख्य कारण?
जब हमारे शरीर को लंबे समय तक आवश्यक पोषक तत्व (जैसे विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स) सही मात्रा में नहीं मिलते, तो उस स्थिति को कुपोषण कहते हैं।
- कुपोषण के मुख्य कारण: गरीबी, भुखमरी, जागरूकता की कमी, अस्वास्थ्यकर माहौल और पौष्टिक भोजन तक पहुंच न होना।
- बचाव के आसान उपाय: डाइट में हरी सब्जियां, फल, दालें और दूध को शामिल करना, सही समय पर टीकाकरण, पर्याप्त नींद और गर्भावस्था के दौरान विशेष देखभाल।
लेटेस्ट अपडेट (POSHAN Abhiyaan): भारत सरकार ने देश में कुपोषण खत्म करने के लिए ‘पोषण अभियान’ (POSHAN Abhiyaan) की शुरुआत की है, जिसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों और डिजिटल तकनीक के जरिए महिलाओं और बच्चों तक सही पोषण पहुंचाया जा रहा है।

फूड एंड न्यूट्रिशन में करियर कैसे बनाएं?
आजकल लोग अपनी फिटनेस और डाइट को लेकर काफी गंभीर हो चुके हैं। जिम, स्पोर्ट्स एकेडमी और अस्पतालों में प्रोफेशनल डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट की मांग तेजी से बढ़ी है।
कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं?
- 12वीं के बाद (B.Sc): यदि आपने 12वीं (Physics, Chemistry, Biology) से की है, तो आप B.Sc in Clinical Nutrition and Dietetics या B.Sc in Food Science कर सकते हैं।
- डिप्लोमा कोर्स: 10+2 के बाद आप खान-पान प्रौद्योगिकी (Catering) या न्यूट्रिशन में 1 से 2 साल का डिप्लोमा ले सकते हैं।
- मास्टर्स और रिसर्च (M.Sc / Ph.D): ग्रेजुएशन के बाद आप न्यूट्रिशन, फूड टेक्नोलॉजी या पब्लिक हेल्थ में M.Sc और PhD करके प्रोफेसर या रिसर्च साइंटिस्ट भी बन सकते हैं।
नौकरी के अवसर और सैलरी
एक सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट बनने के बाद आपके पास काम करने के कई बेहतरीन विकल्प होते हैं:
- बड़े अस्पताल और प्राइवेट नर्सिंग होम
- स्पोर्ट्स और फिटनेस सेंटर
- फूड प्रोसेसिंग कंपनियां और रिसर्च लैब
- खुद का डाइट क्लीनिक (Self Consultant)
सैलरी: इस फील्ड में शुरुआत में ₹15,000 से ₹25,000 प्रति माह से लेकर अनुभव बढ़ने पर ₹2 लाख या उससे अधिक का पैकेज मिल सकता है।
भारत में प्रमुख पढ़ाई संस्थान
अगर आप इस क्षेत्र में पढ़ाई करना चाहते हैं, तो देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालय ये कोर्स ऑफर करते हैं:
- बिहार और झारखंड: रांची वीमेंस कॉलेज, मारवाड़ी वीमेंस कॉलेज, केबी वीमेंस कॉलेज, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी, और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (पूसा)।
- अन्य राष्ट्रीय संस्थान: दिल्ली यूनिवर्सिटी, मुंबई यूनिवर्सिटी, उस्मानिया यूनिवर्सिटी (हैदराबाद), जादवपुर यूनिवर्सिटी और श्रीरामचंद्र मेडिकल कॉलेज।

शिशु मृत्यु दर में सुधार: एक राहत भरी खबर
स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण अभियानों के कारण देश में शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) में सकारात्मक बदलाव देखा गया है।
- मृत्यु दर में कमी: प्रति 1,000 नवजात शिशुओं पर मृत्यु दर 37 से घटकर 34 पर आ गई है।
- क्षेत्रवार स्थिति: शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 23 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी यह 38 बना हुआ है।
| राज्य | शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000) |
| गोवा | 8 |
| केरल | 10 |
| तमिलनाडु | 17 |
| महाराष्ट्र | 19 |
| बिहार | 38 |
| उत्तर प्रदेश | 43 |
| मध्य प्रदेश | 47 |
गोवा और केरल जैसे राज्यों ने स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है। अगर आप भी हेल्थ और न्यूट्रिशन में रुचि रखते हैं, तो यह क्षेत्र न सिर्फ आपको एक बेहतरीन करियर देगा, बल्कि देश को कुपोषण मुक्त बनाने में आपकी मदद भी करेगा!